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एनएच-709: चौटाला-डबवाली-पानीपत-मेरठ निर्माण में देरी से विकास बाधित: कुमारी सैलजा

चंडीगढ़, 3 जनवरी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि वर्ष 2021 में घोषित चौटाला-डबवाली-पानीपत-मेरठ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-709) परियोजना में लगातार हो रही देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। घोषणा के समय यह कहा गया था कि यह महत्वपूर्ण हाईवे अक्टूबर 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि इसकी पूरी डीपीआर तक को अभी तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों को सीधे उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण विकास मार्ग है। इस हाईवे के बन जाने से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होता, आवागमन सुगम होता और पूरे इलाके के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलती। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से श्रीगंगानगर, अबोहर, चौटाला, डबवाली, सिरसा, फतेहाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों को विशेष लाभ मिलना था। कपास, गेहूं, सरसों सहित अन्य कृषि उत्पादों की मंडियों और औद्योगिक केंद्रों तक तेज, सस्ती और सुगम ढुलाई संभव होती, जिससे किसानों की लागत घटती और उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलता। लेकिन परियोजना में देरी के कारण किसानों को आज भी पुरानी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि एनएच-709 का महत्व उद्योगों के लिए भी उतना ही अधिक है। इस हाईवे के माध्यम से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान होती, नए औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलता और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होते। पानीपत, हिसार, सिरसा सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों को इससे सीधा लाभ मिलना था, जो फिलहाल अधर में लटका हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस परियोजना की डीपीआर तैयार करने पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं और यह दो वर्षों से केंद्र सरकार के पास लंबित है, तो फिर निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों हो रही है। विकास से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं में टालमटोल सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह एनएच-709 चौटाला-डबवाली-पानीपत-मेरठ परियोजना की डीपीआर को शीघ्र स्वीकृति दे, निर्माण कार्य की स्पष्ट और व्यावहारिक समय-सीमा घोषित करे तथा वर्ष 2021 में की गई घोषणा को जल्द से जल्द जमीन पर उतारे। उन्होंने कहा कि यह हाईवे किसानों की आय, उद्योगों के विस्तार और सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास से जुड़ा हुआ है और इसे और अधिक समय तक लंबित रखना जनहित के खिलाफ है।

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